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पुरुषार्थ प्रदायक समुद्री रत्न मूंगा Red Corel (Munga)

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पुरुषार्थ प्रदायक समुद्री रत्न मूंगा Red Corel
प्रवालकं प्रवालश्च भौमरत्नच विदु्रमः।
सिन्ध्ुाजं कोरलारण्यच मर्जानश्च तदुच्यते।।
मूंगे को संस्कृत में-प्रवालक, प्रवाल, भौमरत्न, विदु्रम, अंगारक मणि और सिन्ध्ुाज कहते हैं। अंग्रेजी में कोरल ;ब्वतंसद्ध, फारसी में मिरंगा, मर्जान, चीनी में सहूहोची, बर्मी भाषा में टाडा, मराठी में पोले, बंगला में पला कहते हैं।
रंग Colour
शुद्ध मूंगा मूंगिए व सिन्दुरिए रंग का होता है। यह लाल व गुलाबी रंग से हटकर भगवे ;व्तंदहमद्ध जैसे रंग का होता है। इसका रंग इसके नाम से ही पहचाना जाता है।
ज्योतिषीय मूल्यांकन Astrological Value
मंगल ग्रह का सेनापति कहा गया है, इसलिए इसका रत्न मूंगा भी पुरुषों में प्रधन राजपुरुष को पहनाया जाता है, जिसके पहनने से व्यक्ति शत्रुओं का मान-मर्दन करने में सक्षम, दबंग व साहसी हो जाता है।
माहेयस्य च विदु्रयं- जातकपारिजात अ. 1, श्लोक 21, पृ. 36
मंगल का रत्न रक्तवर्णीय मूंगा है। मेष राशि एवं वृश्चिक राशि में जन्म लेने वाले जातकों का राशिरत्न मूंगा है। मूंगा पहनने से मेष एवं वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों का चहुंमुखी विकास होता है। जबकि ‘मेष लग्न’ एवं ‘वृश्चिक लग्न’ में जन्म लेने वाले जातक का जीवनरत्न मूंगा होता है। ‘कर्क लग्न’ में जन्मंे जातक के लिए मूंगा परम भाग्योदयकारी रत्न होता है, जो इनके किस्मत के द्वार खोल देता है। ‘सिंह लग्न’ वालों के लिए भी मूंगा परमभाग्यशाली रत्न साबित होता है। मकर, कुम्भ एवं मीन लग्न वाले भी मूंगा धारण कर सकते हैं, पर इसकी मात्रा व वजन का निर्णय कुशल ज्योतिषी ही कर सकता है।
विदेशी मान्यताओं के अनुसार जनवरी माह में जन्मे लोग ‘मूंगा’ बर्थस्टोन’ के रूप में पहनते हैं। जबकि न्यूमरोलाॅजी के अनुसार 9, 18 एवं 27 तारीखों में जन्में लोगों का मूलांक 9 होता है। अतः मूलांक 9 वाले लोग यदि मूंगा धारण करेंगे तो अपनी योजना Planning में शीघ्र सफलता प्राप्त करेंगे। ऐसे जातक सवा नौ रत्ती का कैरेट का मूंगा पहन सकते हैं। मूलांक नौ हो तथा जन्म भी मंगलवार का हो, तो ऐसे में मूंगा रत्न धारण करने का महत्त्व और भी अधिक बढ़ जाता है।
मूंगा प्राचीन काल से आभूषणों में उपयोग में आता रहा है। रोम निवासी इसको बहुत उपयोग में लाते थे और इनके ताबीज भी बनाते थे। इसकी दैवी शक्ति के सम्बन्ध में अनेक आस्थाएं हैं। भारत में भी प्राचीन काल से मूंगा एक सर्वमान्य रत्न रहा है। इसकी आकर्षक आभा और रंग के कारण मूंगे को नव रत्नों में सम्मिलित किया गया है, यद्यपि यह एक मूल्यवान रत्न नहीं है।
मोती के समान मूंगा भी खनिज पदार्थ नहीं है। इसकी उत्पत्ति वानस्पतिक मानी गई है। परन्तु प्राप्त यह मोती के समान समुद्र से ही होती है। देखने में इसका रूप बेल की शाखाओं जैसा लगता है। आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार यह मूंगा जलजन्तु है। चूने की ठठरी के समान जमाव है और उसका अधिकांश भाग समुद्र से निकले कैल्शियम कार्बोनेट का बना होता है। मूंगे नाम का एक जन्तु, जो गोंद या जैली के समान लसलसा होता है, समुद्र में डूबी हुई कुछ चट्टðानों में चिपक जाता है। उपयुक्त परिस्थितियों मंें वह अपने बाहरी और निचले भाग पर कैल्शियम कार्बोनेट के कठोर जमाव को एकत्रित कर लेता है। बनावट में लाल मूंगा उन छोटी-छोटी नलियों के समान होता है, जो एक-दूसरे से जुड़ी होती हैंे और फिर एक वृक्ष की शाखाओं वेफ समान बढ़ती जाती हैं। मूंगा बनाने वाले जमाव ;क्मचवेपजद्ध सब समुद्रों में, या किसी समुद्र वेफ सब भागों में नहीं पाए जाते। इनके लिए एक निश्चित तापमान की आवश्यकता होती है। मूंगे के जमाव लगभग नौ से 900 फीट की गहराई कम होती है। मूंगा एक जल जन्तु से बनता है। इसलिए जमाव को परिपक्व होने में पाए गए हैं, परन्तु प्राप्त स्थान की गहराई जितनी अधिक होती है, उतनी ही मूंगे के रंग की गहराई में कई वर्ष तक लग जाते हैं, और जब तक जमाव परिपक्व नहीं हो जाता, उसको स्पर्श नहीं किया जाता।

मूगां रत्न 800 रूपये प्रति कैरैट के हिसाब से अज्ञातदर्शन में उपलब्ध है।